मुज़फ्फरनगर। राष्ट्रीय नौजवान जनता दल के अध्यक्ष सुमित खेड़ा की शिकायत पर पीएमओ ने जीवन रक्षक दवाओं की ओवररेटिंग के मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत स्तर पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा जारी पत्र में दवा कीमत नियंत्रण और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

जारी आदेश में बताया गया है कि देश में दवाओं की कीमतों का निर्धारण नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) द्वारा ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत किया जाता है। यह प्राधिकरण आवश्यक और जीवन रक्षक दवाओं के अधिकतम मूल्य (MRP) तय करता है, ताकि आम जनता को उचित दरों पर दवाएं उपलब्ध हो सकें। सभी दवा निर्माता और विक्रेता इन तय कीमतों का पालन करने के लिए बाध्य हैं।
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि NPPA समय-समय पर बाजार में दवाओं की कीमतों की निगरानी करता है और यदि किसी दवा के दाम में असामान्य वृद्धि पाई जाती है, तो वह आवश्यक कदम उठाता है। इसके अलावा, DPCO 2013 के तहत कंपनियों को कीमतों में संशोधन करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है।
सबसे अहम बात यह कही गई है कि यदि कोई दवा विक्रेता या मेडिकल स्टोर संचालक प्रिंट रेट (MRP) से अधिक कीमत वसूलता है, तो यह कानून का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में उपभोक्ता सीधे शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत के लिए ग्राहक को दवा की खरीद का बिल, स्ट्रिप या पैकेट की फोटो सबूत के रूप में उपलब्ध करानी होगी।
शिकायत दर्ज कराने के लिए उपभोक्ता NPPA की आधिकारिक वेबसाइट www.nppaindia.nic.in� पर जाकर ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं या फिर monitoring-nppa@gov.in ईमेल पर पूरी जानकारी भेज सकते हैं। इसके अलावा, संबंधित विभाग द्वारा शिकायत मिलने पर उसकी जांच कर दोषी पाए जाने वाले विक्रेताओं या कंपनियों पर कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जुर्माना या अन्य दंडात्मक कदम शामिल हो सकते हैं।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि इस तरह की व्यवस्था का उद्देश्य आम नागरिकों को राहत देना और दवा बाजार में पारदर्शिता बनाए रखना है। सरकार चाहती है कि कोई भी मरीज या परिजन दवाओं के नाम पर ठगी का शिकार न हो और उन्हें तय दरों पर ही जीवन रक्षक दवाएं मिलें।
यह आदेश प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग के सदस्य-सचिव एस. अहलादिनी पंडा द्वारा जारी किया गया है। साथ ही आम जनता से अपील की गई है कि वे जागरूक रहें, बिल अवश्य लें और यदि कहीं भी ओवररेटिंग हो तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

दवा बाजार का काला सच—मेडिकल स्टोर और डॉक्टरों की कथित सांठगांठ
UP के कई शहरों में दवाओं की ओवररेटिंग का मुद्दा सिर्फ MRP से ज्यादा वसूली तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क भी अक्सर चर्चा में रहता है—मेडिकल स्टोर और कुछ डॉक्टरों के बीच कथित सांठगांठ।
जानकारों के मुताबिक, कई मामलों में मरीज को ऐसी दवाएं लिखी जाती हैं जो किसी खास मेडिकल स्टोर पर ही आसानी से उपलब्ध होती हैं। ये दवाएं अक्सर महंगे ब्रांड की होती हैं, जबकि उसी साल्ट की सस्ती दवाएं बाजार में मौजूद रहती हैं। लेकिन मरीज को उनके बारे में जानकारी नहीं दी जाती।
कैसे चलता है यह खेल?
बताया जाता है कि कुछ मेडिकल स्टोर संचालक और डॉक्टर आपसी समझ के तहत काम करते हैं। डॉक्टर मरीज को एक निश्चित दुकान से दवा लेने के लिए कहते हैं, बदले में मेडिकल स्टोर से उन्हें कमीशन या अन्य लाभ मिलने की बात सामने आती रहती है। इस कारण मरीज को महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं, जबकि सस्ता विकल्प छिपा दिया जाता है।
ओवररेटिंग के साथ डबल मार
इस तरह के मामलों में मरीज दोहरी मार झेलता है—
महंगी ब्रांडेड दवा लिखी जाती है
उसी दवा पर MRP से ज्यादा वसूली भी हो सकती है
नियम क्या कहते हैं?
सरकार और नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) के नियमों के अनुसार, दवाओं पर तय अधिकतम कीमत से ज्यादा वसूली गैरकानूनी है। वहीं, मेडिकल एथिक्स के तहत डॉक्टरों को मरीज को जेनेरिक या किफायती विकल्प बताना चाहिए, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन हमेशा नहीं होता।
मरीज क्या करें?
डॉक्टर से दवा का जनरिक नाम (Salt Name) पूछें
अलग-अलग मेडिकल स्टोर पर कीमत की तुलना करें
हमेशा बिल लें
ओवरचार्जिंग पर शिकायत दर्ज करें
प्रशासन की नजर
हाल ही में पीएमओ के संज्ञान और प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग के आदेश के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इस तरह की अनियमितताओं पर सख्ती बढ़ेगी। यदि जांच में डॉक्टरों और मेडिकल स्टोर की मिलीभगत सामने आती है, तो संबंधित लोगों पर कड़ी कार्रवाई संभव है।
यह साइड स्टोरी साफ इशारा करती है कि दवा बाजार में पारदर्शिता लाने के लिए सिर्फ नियम बनाना काफी नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त निगरानी और जागरूकता भी जरूरी है।














