इंजीनियर फिरोज मुजफ्फर हनफी दिल्ली स्टेट के महासचिव निर्वाचित
नई दिल्ली। उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन दिल्ली स्टेट की महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को मदिना बुक डिपो, ख्याला (पटेल नगर) में डॉ. मुफ्ती जावेद अनवर की अध्यक्षता में हुई। बैठक में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सैयद अहमद खान भी मौजूद रहे। उन्होंने संगठन की गतिविधियों और उर्दू के प्रचार-प्रसार को लेकर आवश्यक सुझाव दिए।
बैठक की शुरुआत संगठन के संस्थापक महासचिव डॉ. परवाज उलूम के जल्द स्वस्थ होने की दुआ के साथ हुई। वक्ताओं ने उर्दू के प्रचार-प्रसार और विकास में उनके योगदान को याद करते हुए उनकी सेवाओं की सराहना की।
बैठक में संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा की गई। पश्चिमी दिल्ली में शहादत अली निजामी के नेतृत्व में उर्दू के प्रचार-प्रसार और विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की गई।
उर्दू माध्यम स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठा
वसीम अहमद सिद्दीकी ने उर्दू माध्यम स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई बच्चे उर्दू पढ़ना चाहते हैं, लेकिन पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें उर्दू की शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए प्रभावी प्रयास किए जाने की जरूरत बताई।
शेख अलीमुद्दीन असअदी ने उर्दू के प्रचार-प्रसार और विकास को लेकर विस्तार से सुझाव दिए। उनके सुझाव पर संगठन को दिल्ली में चार जोन में विभाजित कर प्रत्येक जोन के लिए संयोजक नियुक्त करने पर सहमति बनी। शहादत अली निजामी को पश्चिमी जोन दिल्ली और वसीम अहमद सिद्दीकी को वॉल सिटी जोन दिल्ली की जिम्मेदारी सौंपी गई।
फिरोज मुजफ्फर हनफी बने महासचिव
बैठक में सर्वसम्मति से इंजीनियर फिरोज मुजफ्फर हनफी को उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन दिल्ली स्टेट का महासचिव चुना गया। महासचिव चुने जाने पर उन्होंने खुशी जताई और कहा कि वह जमीनी स्तर पर उर्दू के प्रचार-प्रसार और विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे।
प्रमुख स्थानों पर उर्दू में लिखने पर जोर
बैठक में उर्दू को सार्वजनिक जीवन में अधिक प्रमुखता दिलाने के लिए लिखित अभियान शुरू करने का निर्णय लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि उर्दू की सुरक्षा और विकास के लिए उर्दू लिपि का अधिक से अधिक इस्तेमाल जरूरी है। इसके लिए उर्दू भाषी क्षेत्रों की पहचान कर विशेष रणनीति तैयार करने पर भी सहमति बनी।
संगठन की ओर से प्रमुख स्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर हिंदी और अंग्रेजी के साथ उर्दू में भी नाम और सूचनाएं लिखे जाने पर जोर देने का फैसला किया गया।
बैठक में प्रसिद्ध शायर एवं वरिष्ठ पत्रकार वफा आजमी, डॉ. शकील अहमद, डॉ. गयासुद्दीन सिद्दीकी, डॉ. महमूद आलम, हकीम मोहम्मद मुर्तजा देहलवी, इसरार अहमद उजैनी, वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद ओवैस, मोहम्मद शाहिद, शारिक अली सिद्दीकी और मोहम्मद इमरान कन्नौजी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
उर्दू के प्रचार-प्रसार के लिए लिखित अभियान शुरू करने का फैसला














