उत्तर प्रदेश यूनानी सेवा विभाग की समस्याओं और लंबित मुद्दों को लेकर बैठक में उठी आवाज, जोन-3 से डॉ. मुईद अहमद को विजयी बनाने की अपील
लखनऊ। ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस (उत्तर प्रदेश) की एक महत्वपूर्ण बैठक ऐशबाग, लखनऊ में संगठन के उत्तर प्रदेश मुख्य संरक्षक मोहम्मद खालिद (नेताजी) के आवास पर आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता डॉ. सैयद अहमद खान ने की। इसमें प्रदेश में यूनानी चिकित्सा पद्धति की मौजूदा स्थिति, उसके विकास, प्रचार-प्रसार और यूनानी सेवा विभाग से जुड़े लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में संगठन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. शेख मोहम्मद याकूब, डॉ. मोहम्मद ओवैस हसन, डॉ. एहतेशाम अली, डॉ. सैयद जुबैर, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. एस.एम. अहसन एजाज, उपाध्यक्ष डॉ. शुजाउद्दीन अहमद, प्रदेश महासचिव डॉ. अकमल अलवी, यूथ विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. खुबैब अहमद, महासचिव डॉ. एजाज अली कादरी, मोहम्मद इमरान कन्नौजी, हकीम रशादुल इस्लाम, डॉ. फुरकान रजा और डॉ. जीशान अंसारी सहित अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।
बैठक में सर्वसम्मति से आयुर्वेद, यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड, उत्तर प्रदेश के चुनाव में जोन-3 से उम्मीदवार डॉ. मुईद अहमद के समर्थन में अपील की गई। वक्ताओं ने कहा कि यूनानी चिकित्सा पद्धति के विकास और चिकित्सकों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए योग्य एवं सक्रिय प्रतिनिधित्व जरूरी है।
इस अवसर पर बैठक की अध्यक्षता कर रहे डॉ. सैयद अहमद खान ने डॉ. मुईद अहमद की सराहना करते हुए कहा कि वह यूनानी चिकित्सा पद्धति के सच्चे सिपाही, प्रतिष्ठित व्यक्तित्व और नेकदिल इंसान हैं। ऐसे उम्मीदवार का समर्थन करना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने प्रदेश में यूनानी चिकित्सा पद्धति की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में यूनानी सेवा विभाग की सेवा नियमावली (आरआर) अब तक तैयार नहीं हो सकी है। इसके अलावा डीओ यूनानी को पूर्ण अधिकार प्राप्त नहीं हैं। इन परिस्थितियों के कारण विभागीय कार्यों और यूनानी चिकित्सा पद्धति के विकास में अपेक्षित गति नहीं आ पा रही है।
डॉ. खान ने राजकीय यूनानी मेडिकल कॉलेज, बरेली का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कॉलेज का निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद अब तक वहां शैक्षणिक सत्र शुरू नहीं हो सका है। यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। इससे यूनानी चिकित्सा की पढ़ाई करने के इच्छुक विद्यार्थियों को भी अपेक्षित अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सेवा नियमावली का गठन, विभागीय अधिकारियों को पूर्ण अधिकार देना और बरेली स्थित राजकीय यूनानी मेडिकल कॉलेज में जल्द शैक्षणिक सत्र शुरू कराना बेहद जरूरी है। उत्तर प्रदेश यूनानी सेवा विभाग को इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करते हुए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने भी कहा कि यूनानी चिकित्सा पद्धति देश की पारंपरिक चिकित्सा विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सरकार एवं संबंधित विभाग को ठोस कदम उठाने चाहिए। संगठन ने उम्मीद जताई कि संबंधित अधिकारी इन समस्याओं का संज्ञान लेकर शीघ्र समाधान की दिशा में प्रभावी पहल करेंगे।













