उत्तराखंड में अरेस्ट हुए लविश चौधरी क़े 2 गुर्गे.. 1200 करोड़ ₹ की ठगी का खुलासा

1200 करोड़ की ठगी का नेटवर्क! ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर हजारों लोगों को बनाया शिकार, STF ने दो को दबोचा
विदेश यात्रा, डॉलर में कमाई और कम समय में अमीर बनने का दिया जाता था लालच

विदेश में बैठा लविश चौधरी चला रहा था नेटवर्क, कई कंपनियों के जरिए जुटाई जा रही थी रकम

कविता की रेफरल आईडी से जुड़े थे 10 से 15 हजार लोग, तीन साल में 12 से 13 बार विदेश यात्रा कर चुकी थी आरोपी

देहरादून। ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर उत्तराखंड के लोगों से 1200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित ठगी करने वाले नेटवर्क का एसटीएफ ने पर्दाफाश किया है। स्पेशल टास्क फोर्स ने कार्रवाई करते हुए देहरादून से नवीन सिंह नेगी और कविता परमार को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि नेटवर्क से जुड़े लोग अधिक मुनाफे, विदेश यात्राओं और कम समय में अमीर बनने का लालच देकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित करते थे। इस नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड लविश चौधरी विदेश में बैठकर संचालन कर रहा था।
एसटीएफ की जांच में पता चला कि लविश चौधरी बोटब्रो, बोटअल्फा, क्रॉस मार्केट, माइन क्रिप्टो, मेटा ट्रेड-5, फाइनेंशियल फ्रीडम और टीएलसी कॉइन जैसी कंपनियों के माध्यम से निवेश का नेटवर्क चला रहा था। जांच एजेंसी के मुताबिक, ये कंपनियां भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) में पंजीकृत नहीं थीं।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित हुई थी एसआईटी

आईजी एसटीएफ डॉ. नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने पूरे नेटवर्क के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच के लिए एसआईटी गठित की थी। एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह की निगरानी में टीम अलग-अलग जिलों में दर्ज मामलों की एकीकृत विवेचना कर रही है। जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं के बयान, बैंक खातों का विवरण और तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
2022 से नेटवर्क से जुड़ा था नवीन नेगी
जांच में सामने आया कि रुद्रप्रयाग निवासी और वर्तमान में देहरादून के रायपुर क्षेत्र में रहने वाला नवीन सिंह नेगी वर्ष 2022 से क्यूएफएक्स कंपनी से जुड़ा था। शुरुआत में उसने खुद निवेश कर लाभ कमाया। बाद में विदेश में बैठे लविश चौधरी के संपर्क में आने के बाद बोटब्रो और बोटअल्फा जैसी कंपनियों के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए जोड़ने लगा। एसटीएफ के मुताबिक, प्रदेश में हजारों लोगों को इस नेटवर्क से जोड़कर 1200 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई। वहीं, पूरे देश में इस नेटवर्क के जरिए 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

मामले दर्ज होने के बाद नई कंपनी के नाम पर शुरू किया प्रचार
एसटीएफ के मुताबिक, बोटब्रो कंपनी बंद होने और उसके खिलाफ विभिन्न शिकायतें दर्ज होने के बाद भी नेटवर्क से जुड़े लोगों ने काम बंद नहीं किया। आरोप है कि लोगों को जोड़ने के लिए रिसनेवेज नाम की नई कंपनी का प्रचार शुरू कर दिया गया। जूम मीटिंग और ऑनलाइन बैठकों के माध्यम से लोगों को नए बिजनेस से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। दोबारा इसी तरह की धोखाधड़ी की आशंका को देखते हुए देहरादून साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।
कविता की रेफरल आईडी से जुड़े थे 10 से 15 हजार लोग
एसटीएफ की पूछताछ में बालावाला निवासी कविता परमार की भूमिका भी सामने आई। जांच के अनुसार, वह वर्ष 2022 से क्यूएफएक्स कंपनी से जुड़ी थी। उसने खुद और परिजनों की आईडी बनाकर निवेश किया। इसके साथ ही अपनी रेफरल आईडी के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को नेटवर्क से जोड़ा। कंपनी में वह सीनियर ईगल एग्जीक्यूटिव के पद तक पहुंच गई थी। पूछताछ में कविता ने बताया कि उसे कंपनी से हर महीने करीब एक हजार डॉलर का लाभ मिलता था।
तीन साल में 12 से 13 बार विदेश यात्रा, खर्च उठाती थी कंपनी
एसटीएफ के अनुसार, कविता वर्ष 2023 से 2026 के बीच कंपनी के सेमिनारों में शामिल होने के लिए मलेशिया, थाईलैंड, दुबई और वियतनाम की करीब 12 से 13 बार यात्रा कर चुकी थी। इन यात्राओं के दौरान आने-जाने, रहने और खाने का पूरा खर्च कंपनी उठाती थी। देहरादून समेत उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में वह कंपनी का प्रचार करती थी। जूम मीटिंग और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए जोड़ती थी। इन ऑनलाइन बैठकों में एक समय पर करीब एक हजार लोग शामिल होते थे।
खातों में डॉलर दिखते थे, लेकिन वास्तविक रकम नहीं होती थी
पूछताछ में कविता ने बताया कि निवेशकों की ओर से कंपनी के बैंक खातों में जमा कराई गई रकम के बदले उनके ऑनलाइन खातों में डॉलर के रूप में आंकड़े प्रदर्शित किए जाते थे। हालांकि, ये वास्तविक धनराशि नहीं होती थी। एसटीएफ इस व्यवस्था को नेटवर्क की कार्यप्रणाली से जुड़ा महत्वपूर्ण साक्ष्य मान रही है। अब निवेशकों से जुटाई गई रकम के वास्तविक स्रोत और उसके ठिकानों का पता लगाया जा रहा है। बैंक खातों, नकद लेनदेन और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से हुए लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
दो मोबाइल बरामद, विदेश में बैठे मास्टरमाइंड की तलाश
एसटीएफ ने नवीन सिंह नेगी को साइबर क्राइम थाने में दर्ज नए मुकदमे और कविता परमार को डोईवाला थाने में दर्ज मामले के तहत गिरफ्तार किया है। नवीन के कब्जे से वीवो और ओप्पो कंपनी के दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। इनमें ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, बैंकिंग विवरण, व्हाट्सएप चैट और ट्रेडिंग खातों से जुड़े साक्ष्य मिलने की संभावना है। एसटीएफ इनकी जांच कर रही है। वहीं, विदेश में बैठे लविश चौधरी और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
एसटीएफ की निवेशकों से अपील

एसटीएफ ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन निवेश के नाम पर अत्यधिक मुनाफे, विदेश यात्रा और कम समय में धन दोगुना करने का लालच देने वाली कंपनियों से सावधान रहें। किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले उसका आरबीआई और सेबी में पंजीकरण जरूर जांचें। अनधिकृत कंपनियों और आकर्षक रेफरल योजनाओं के झांसे में आकर अपनी जमा पूंजी जोखिम में न डालें।