जनगणना के दौरान मातृभाषा कॉलम में उर्दू दर्ज कराएं मुस्लिम समाज के लोग : डॉ. असलम

जनगणना के दौरान मातृभाषा कॉलम में उर्दू दर्ज कराएं मुस्लिम समाज के लोग : डॉ. असलम

मुज़फ्फरनगर में वीर अब्दुल हमीद चौक स्थित शमीम कससार के आवास पर उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार और उसके विकास को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी, मेरठ के उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. असलम जमशेदपुरी ने अपने विचार रखे।

 

 

उन्होंने कहा कि उर्दू हिंदुस्तान की गंगा-जमुनी तहजीब की पहचान है और इसे जिंदा रखने की जिम्मेदारी हम सभी की है। उर्दू न सिर्फ अदब की भाषा है, बल्कि यह समाज को जोड़ने का भी काम करती है। अगर नई पीढ़ी को इस भाषा से जोड़ा गया, तो उर्दू का भविष्य और मजबूत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही जनगणना प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, ऐसे में मुस्लिम समाज के लोगों को चाहिए कि वे अपनी मातृभाषा के रूप में उर्दू ही दर्ज कराएं, ताकि उर्दू का भविष्य सुरक्षित और मजबूत बना रह सके।

  • बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाध्यक्ष कलीम त्यागी ने कहा कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी साझा विरासत है। इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए ठोस और संगठित प्रयास जरूरी हैं।

 

कॉर्डिनेटर तहसीन अली ने उर्दू शिक्षा को बढ़ावा देने, स्कूलों में इसकी पढ़ाई को मजबूत करने और सरकारी स्तर पर उर्दू को उसका हक दिलाने पर जोर दिया। साथ ही राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (एनसीपीयूएल) के पुनर्गठन की मांग भी उठाई गई।

संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि उर्दू के विकास के लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम, मुशायरे और शैक्षिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, ताकि युवाओं में इस भाषा के प्रति रुचि बढ़ सके।

बैठक में सभी सदस्यों ने उर्दू के संरक्षण और संवर्धन के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया। इस दौरान सलामत राही, नदीम मलिक, गुलफाम अहमद आदि मौजूद रहे।