साहित्य

दिल का भंवर करे पुकार… प्यार का राग सुनो….।

दिल का भंवर करे पुकार… प्यार का राग सुनो….
आहह!इतना प्यारा इजहार..
कितनी मासूमियत है इस इजहार में।मन में तरंगें से उठने लगती हैं और प्रेम?वह तो प्रफुल्लित हो खुद ही खिलने लगता है।

एक लड़का और एक लड़की…
साथ में है प्रेम,जो चुपचाप दोंनो को करीब ला रहा है लेकिन… एक शर्म एक झिझक दोनों में है इसलिए दोनों नजरों से ही सब कह देना चाहते हैं।।

एक शरारत है शोखी है और है चंचल सा प्यार..

“आँखों में क्या जी
रुपहला बादल…
बादल में क्या जी
किसी का आँचल
आँचल में क्या जी
अजब सी हलचल….

नटखट सी ठिठोली और तलाशते प्रेम को दो दीवाने सवालों में ही ढूंढ रहे हैं।

#प्रेम
शब्द ही ऐसा है जिसे सुनते ही मन में अजीब सी गुदगुदी होने लगती है।कोई लाख कहे कि हम इस प्यार व्यार में नहीं पड़ते।लेकिन सच तो यह है कि वह भी प्यार की तलाश में रहते हैं।ऐसे प्रेम की तलाश जो उनकी कमियों के बाद भी उनके साथ हो।अपने प्यार को करीब रखना चाहते हैं लेकिन डरते हैं कि कहीं उनकी तकलीफों से उसका प्रेम मुरझा न जाए।
यह तो दिल का रिश्ता है जनाब,यूँही नही जुड़ जाता है।चाहो लाख समझा लो बहाना बना लो।पर दिल तो आपका भी बेचैन है अपने मन के भावों को उनके सामने प्रकट कर देने के लिए।
ओढ़ लो चाहे बादलों का आवरण बारिश से कभी क्या बच पाओगे?
‘इतना न मुझसे तू प्यार जता ,मैं एक बादल आवारा
कैसे किसी का सहारा बनूं
कि एक बेघर बेचारा..

इसलिए तुझसे मैं प्यार करूँ
कि एक बादल आवारा
जन्म जन्म से हूँ साथ तेरे कि नाम मेरा जल की धारा…

कह तो दिया हर परिस्थिति में तुम्हारे साथ हूँ क्या फिर भी बच पाओगे अपने प्यार से?
मोहब्बत है तो रूठना है और रूठना है तो मनाना भी होगा।और अपनी उपस्थिति को दृढ़ता से बताना भी होगा,

“अजी रूठ कर अब कहाँ जाइएगा…’
इतना सरल है क्या अपनी दिल पर काबू रख पाना जब आँचल सामने से लहरा कर निकल जाए! यह अदाएं ही तो रौनक है मोहब्बत की।यूँ रूखी सूखी जिंदगी को जीने से क्या फायदा?
कह भी दें इन अदा वालों को कि हम गिरफ्तार है आपके ही इश्क़ में,तो यूँ हम पर बिजली तो न गिराएं
‘हुजूर इस कदर भी न इतराके चलिए
खुलेआम आँचल न लहरा चलिए
हुजूर इस कदर…

दिल के गलीचे से चलते हुए वह पाँव पायल छनका कर यूँ ही निकल जाते हैं तो जुबाँ और तबीअत शायराना होना तो लाजिमी है।
न न यह छेडछाड नहीं।यह तो मखमली एहसास है जो दिल के संदूक से खुद निकल आते हैं तालों को तोड़कर।

यह नजाकत यह अदाएं यह रूठना यह मनाना।इसे यूँही बनाएं रखें वरना यह प्रेम का रिश्ता निरस हो जायेगा।

प्रेम की सात्विकता है जो याद करने पर टेलीपैथी बन हिचकी का रूप ले लेती है।आसमान में चमकता चाँद भी आपकी बातें सुनता है और हवाएं संदेशा ले चलती हैं।
इस प्रेम पर न जाने कितने कवियों ने अपनी जिंदगी लिख दी।

“याद किया दिल ने कहाँ हो तुम
झूमती बहार है कहाँ हो तुम…

‘ये रात भीगी भीगी यह मस्त फिजाएं
उठा धीरे धीरे ये चाँद प्यारा
…..

इन गीतों में जो प्रेम है वह मन को मन से मिलाता है।जिसे सुनते रहने का जी चाहता है और मन कहता है डूब जाओ प्रेम में।

“आजा सनम मधुर चाँदनी में हम…

कितना प्यारा आमंत्रण है।न देह का प्रदर्शन न वासना का निमंत्रण।

प्रेम में नोंक झोंक और अधिकार जताना।अपना हक कायम रखना।जिद करना।बचपना लग सकता है बहुतों को लेकिन सच तो यह है कि इनके बिना आप मासूम प्रेमी प्रेमिका नहीं बल्कि धीर गंभीर बुजुर्ग बन जाते हैं।
अपने जीवन में प्रेम खिलने दीजिए।
प्रैक्टिकल बनकर मशीनी मानव न बने।

आज गुनगुनाइए इन गीतों को इस दिसंबर की गुलाबी सर्दी में और अपने प्रेम की आँखों में आँखें डालकर कह दें जो कहना है।

दिव्या शर्मा

गुडगांव हरियाणा

7303113924

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