मेरठ की सातों सीटें जीतने की जुगत में भाजपा

शहर सीट को छोड़कर मौजूदा समय में 6 सीटें भाजपा के खाते में
तीन सीटों पर प्रत्याशी बदलेगी पार्टी, दो सीटों पर असमंजस, दो सीटों पर टिकट लगभग तय
लियाकत मंसूरी
मेरठ। प्रदेश में चुनावी बिगुल बजते ही प्रत्याशियों ने लखनऊ की दौड़ लगा दी है। आगामी दस फरवरी को चुनाव होने के कारण सभी राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशियों ने लखनऊ में डेरा डाल दिया है। सपा और बसपा ने दो-तीन विधानसभाओं में अपने प्रत्याशियों के नाम खोल दिए है, लेकिन अभी तक भाजपा ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कैंट, किठौर और शहर की विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों को लेकर कांटे की टक्कर है। सूत्रों की माने तो अन्य सीटों पर भाजपा मौजूदा विधायकों पर ही दाव लगा सकती है।
मेरठ जनपद में सात विधानसभा सीटें हैं। मौजूदा समय में 6 सीटें भाजपा के खाते में हैं, जबकि समाजवादी पार्टी से हाजी रफीक अंसारी शहर विधायक है। भाजपा का टारगेट इस बार सातों विधानसभाओं में अपना वर्चस्व कायम करना है। पार्टी किसी भी हालत में कमजोर प्रत्याशी को मैदान में उतारने के मूड में नहीं है। एकमात्र हारी हुई विधानसभा सीट पर पार्टी ऐसा प्रत्याशी उतारना चाहती है जो जीत सके। सूत्रों की माने तो पार्टी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेई को टिकट नहीं देंगी। अगर 2022 में भाजपा की सरकार बनती है तो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को पार्टी आयोग का चेयरमैन बनाने की तैयारी कर रही है। शहर सीट पर भाजपा नए चेहरे की तलाश में है। प्रदेश सरकार में दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री पंडित सुनील भराला और पीयूष शास्त्री के नाम आला कमान की सूची में है। इन दोनों के बीच टिकट को लेकर कांटे की टक्कर होंगी। कैंट विधानसभा सीट के हालात भी शहर सीट से जुदा नहीं है। यहां भी पार्टी नया चेहरा लेकर आने की तैयारी में है। मौजूदा विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल का टिकट कटना लगभग तय है। बुजुर्ग होने के कारण पार्टी नया चेहरा खोज रही है, जिसमें महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल सबसे आगे हैं। हालांकि पूर्व विधायक अमित अग्रवाल उनकी राह में रोड़ा बने हुए हैं। मुकेश सिंघल की संघ के पूर्व क्षेत्रीय प्रचारक आलोक कुमार से नजदीकी के कारण मुकेश सिंघल मतबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं।
इन दो सीटों पर असमंजस की स्थिति
सिवालखास विधानसभा सीट के विधायक जितेंद्र सतवाई को भाजपा आलाकमान असमंजस में है। पांच साल गुजर गए, लेकिन विधायक क्षेत्र में नजर नहीं आए। क्षेत्र में शिकायतों को लेकर जितेंद्र सतवाई का पक्ष कमजोर पड़ रहा है, मगर यहां से किसी ओर कार्यकर्ता की प्रत्याशी के रूप में मजबूत दावेदारी न होने के कारण जितेंद्र सतवाई पर पार्टी फिर से गेम खेल सकती है? दक्षिण विधायक डा. सोमेंद्र तोमर को लेकर भी लखनऊ में नाराजगी है, फिर भी पार्टी डा. सोमेंद्र का टिकट काटने के मूड में नहीं है। जातीय समीकरण की वजह से डा. सोमेंद्र टिकट पर अपनी दावेदारी मजबूती से पेश कर रहे हैं।
इन दो सीटों पर टिकट काटने के मूड में नहीं पार्टी
किठौर विधानसभा से सत्यवीर त्यागी का टिकट कटना लगभग तय है। पार्टी यहां नए चेहरे को मैदान में उतारेगी। जागृति विहार के पार्षद सचिन त्यागी और संजय त्यागी दौड़ में शामिल है। कांग्रेस (पूर्व जिलाध्यक्ष) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए विनय प्रधान इस दावेदारी में सबसे मजबूत है। सूत्रों की माने तो सचिन त्यागी और विनय प्रधान के बीच कांटे की टक्कर है। सरधना और हस्तिनापुर सीट पर पार्टी छेड़छाड़ के मूड में नहीं है। सरधना से संगीत सोम और हस्तिनापुर से मंत्री दिनेश खटीक को फिर से टिकट मिलना लगभग तय है।




