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लग्जरी कारों पर नजर आने लगा चिप की कमी का असर

सेमीकंडक्टर अथवा चिप की कमी से कारों और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का उत्पादन इस कदर प्रभावित होने लगा है कि दो लग्जरी कारों को अपने ऑटोमैटिक रियर व्यू मिरर ही हटाने पड़ गए। ये हैं- स्कोडा कुशाक और वोक्सवैगन ताइगुन। यह बदलाव सभी वेरिएंट के लिए किया गया है। इसलिए, भले ही लोग टॉप-स्पेक वेरिएंट का विकल्प चुनें, उन्हें बाहरी रियर व्यू मिरर को हाथ से ही मोड़ना होगा। इसके पीछे कारण सेमीकंडक्टर की वैश्विक कमी है। स्कोडा ऑटो इंडिया के बिक्री, सेवा और मार्केटिंग के एक अधिकारी से ट्विटर पर किसी ने पूछा कि ऐसा क्यों किया गया तो उन्होंने जवाब दिया कि उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही आपूर्ति की समस्या का समाधान हो जाएगा। यानी स्कोडा आने वाले समय में इस फीचर को फिर से जोड़ सकती है। वेबसाइट पर पुराने ब्रोशर को अपडेट किया गया है। चिप की कमी के कारण पूरी दुनिया की ऑटोमोबाइल कंपनियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भारत में बड़ी कार कंपनियों के सामने भी यह समस्या कुछ खास है। मजबूरन इन्हें अपना उत्पादन कम करना पड़ रहा है।

चूंकि चिप की कमी की समस्या लंबी चलने वाली है और इसका तात्कालिक समाधान नजर नहीं आ रहा है, इसलिए टाटा मोटर्स ने खुद से चिप बनाने का निर्णय लिया है। कंपनी इसके लिए आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेम्बली एवं टेस्टिंग प्लांट लगाएगी। इस तरह के प्लांट में सिलिकॉन वेफर्स को चिप में बदला जाता है। यह प्लांट तमिलनाडु, कर्नाटक अथवा तेलंगाना में लगाया जा सकता है, हालांकि अभी इस बारे में अंतिम निर्णय राज्य सरकारों की सहमति मिलने के बाद ही लिया जायेगा। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए टाटा समूह 2200 करोड़ रुपये तक निवेश कर सकता है। नयी कारों की मांग बराबर बनी हुई है, परंतु कार कंपनियां कारों की आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं। हालत यह है कि इच्छुक खरीदारों को अपनी पसंद की गाड़ी की डिलीवरी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इस देरी और अनिश्चित आपूर्ति के लिए सेमीकंडक्टर यानी चिप की कमी सबसे बड़ी वजह बतायी जा रही है। दूसरी वजह कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि होना है। चिप की कमी से कई कार कंपनियों को मांग के बावजूद अपना उत्पादन कम करना पड़ रहा है।

बीते साल अक्टूबर माह में कारों की थोक बिक्री में 27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी, जो कोविड-पूर्व, अक्टूबर 2019 की बिक्री से 16.7 प्रतिशत कम थी। यानी कोविड काल में जितनी कारों की सेल हुई, उससे भी कम कारें बिक पायीं। बीते सितंबर में तो स्थिति और भी खराब थी, जब थोक बिक्री सालाना आधार पर 41.16 प्रतिशत घट गयी और सितंबर 2019 के मुकाबले करीब 26 प्रतिशत कम रही। ऑटोमोबाइल कंपनियों के संगठन – सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के महानिदेशक राजेश मित्तल के अनुसार, वाहन निर्माताओं को उम्मीद थी कि चालू वित्त वर्ष की शुरुआत में कम बिक्री हुई तो क्या, त्योहारी सीजन में हिसाब बराबर हो जायेगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आमतौर पर सिलिकॉन से बने चिप का उपयोग कई प्रकार के उपकरणों जैसे कार, लैपटॉप, स्मार्टफोन, घरेलू उपकरण और गेमिंग कंसोल को बिजली सप्लाई करने के लिए किया जाता है। चिप से कई कार्य होते हैं, जैसे कि पॉवर डिस्प्ले और डेटा ट्रांसफर आदि। इसलिए, आपूर्ति की कमी का प्रभाव पड़ना लाजिमी है।

नरविजय यादव वरिष्ठ पत्रकार व कॉलमिस्ट हैं। 

ईमेल: narvijayindia@gmail.com

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