गिरोह बनाकर वक्फ की संपत्ति को किया जा रहा बंदरबाट,मेरठ से लखनऊ तक फैला है गौरखधंधे का जाल, भाजपा नेता डीएम से की शिकायत
मेरठ। जनपद में वक्फ संपत्ति को बेचने का गोरखधंधा चल रहा है। शहर में कई गिरोह बने हुए हैं, जो जायदाद का बंदरबाट कर रहे हैं। यह जाल मेरठ से लेकर लखनऊ तक फैला हुआ है। इस संबंध में एक पीड़ित के साथ भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा प्रदेश कार्य समिति के सदस्य काजी शादाब डीएम से मिलें। उन्होंने शिकायत करते हुए मामले में दख्ल देने की मांग की है।
भाजपा नेता काजी शादाब ने आधा दर्जन केस डीएम के सामने पेश किए। घंटाघर कोटला निवासी आजम खान व फैसल पर आरोप लगाया गया है, ये दोनों वक्फ संपत्ति को गिरोह बनाकर हड़प रहे हैं। भाजपा नेता की माने तो वक्फ अधिकारियों से ये दोनों अपना ताअल्लुक बताते हैं। कबाड़ी बाजार स्थित वक्फ संख्या-526 का जिक्र किया गया, बताया कि मुतव्वली नदीम अहमद पुत्र इमदाद अली निवासी- 514, सरदार पटेल गंज ने पहले दुकान की किराएदारी के लिए जुनैद के नाम की रसीद काट दी। परन्तु फैसल ने जब दबाव बनाया तो मुतवल्ली ने उसके पश्चात उक्त दुकान की रसीद अपनी पत्नी के फरहीन खानम के नाम से कटवा ली। डीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल ही जांच के आदेश दे दिए।
केस-1, वक्फ संख्या-646 मुसाफिर खाना मोहल्ला कोटला में वक्फनामे की शर्तो का उल्लंघन किया गया है। वक्फ-3515 कोटला की सम्पत्ति को खरीदने, बेचने वाले कासिम सलमानी को प्रबन्ध समिति में सचिव नियुक्त आजम खान के सहयोग से कराया गया। अब कासिम और आजम एक साथ मिलकर मुसाफिर खाना बेचने का प्लान कर रहे हैं।
केस-2, वक्फ संख्या-400, 401 महत्वपूर्ण वक्फ हैं। सेटिंग करके आजम खान व फैसल इस संपत्ति में सदर व सैक्रेटरी बन गए। पिछले माह वक्फ के किराएदार सरदार ठाकुर सिंह की मृत्यु हो गई। उसके बाद ठाकुर सिंह के पुत्र के नाम रसीद काटने के लिए चार लाख रुपये लिए गए। वक्फ-3515 बेचने वाले हाशिम को कमेटी 400-401 में सदर बना दिया।
केस-3, आजम, फैसल ने वक्फ संख्या-526 मस्जिद अनार वाली की दुकान व कमरा साजिश करके कमेटी को फर्जी वक्फ बोर्ड का पत्र दिखाकर धमकाया। कमेटी को धोखा देकर फैसल ने आजम खान के सहयोग से दुकान, कमरा अपनी की पत्नी के नाम रसीद बनवा ली।
केस-4, वक्फ संख्या-526 के मुतव्वली नदीम अहमद पुत्र इमदाद अली निवासी- 514, सरदार पटेल गंज, कबाड़ी बाजार द्वारा पहले वक्फ की सम्पत्ति की दुकान की किराएदारी के लिए जुनैद के नाम की रसीद काटी गयी, परन्तु उसके पश्चात ही उक्त दुकान की रसीद फरहीन खानम पत्नी फैसल के नाम से काट दी।















