अपराध

“एक नौकरी, जो रोज़ एक झूठ बेचती थी” .. कर्मचारी की हिम्मत से खुला इंटर नेशनल फ्रॉड

150 कुर्सियाँ, एक सच...और 50 करोड़ की ठगी

UP के कानपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने साइबर क्राइम की दुनिया को हिला कर रख दिया है। MBA पास युवक पुलकित द्विवेदी ने एक हाई-टेक कॉल सेंटर खड़ा किया, और उसके ज़रिए देश-विदेश के बिजनेसमैनों से करीब 50 करोड़ रुपये की ठगी कर डाली।

“ये कॉल सेंटर कोई छोटा-मोटा जुगाड़ नहीं था—150 से ज़्यादा कर्मचारी, हर महीने 50 लाख रुपये की सैलरी, और रोजाना 15 से 20 लाख रुपये का साइबर फ्रॉड।”

“लोकेशन थी कानपुर के ग्रीन पार्क के सामने की एक बिल्डिंग, जहाँ पहले और दूसरे फ्लोर पर Webixy Technologies Pvt. Ltd. और Global Trade Plaza के नाम से कंपनियाँ चल रही थीं।यहाँ से कॉल किए जाते थे इंडोनेशिया, थाईलैंड, म्यांमार, नाइजीरिया और अमेरिका जैसे देशों में बैठे व्यापारियों को। उन्हें बड़े ऑर्डर और रजिस्ट्रेशन का झांसा दिया जाता था। और फिर उनसे मोटी रकम ऐंठ ली जाती थी।”

🕵️‍♂️ “लेकिन इस हाई-प्रोफाइल ठगी का पर्दाफाश हुआ एक अंदरूनी शिकायत से।”

“कंपनी के ही एक कर्मचारी ने पुलिस को गुप्त सूचना दी। गुरुवार को क्राइम ब्रांच ने छापा मारा और मुख्य सरगना पुलकित द्विवेदी को गिरफ्तार कर लिया। उसकी पत्नी वर्तिका और तकनीकी साथी सत्यकाम साहू फिलहाल फरार हैं। पुलिस ने मौके से 57 स्मार्टफोन, 78 डेस्कटॉप, भारी मात्रा में दस्तावेज और 4.30 करोड़ रुपये के बैंक खाते सीज़ किए हैं।”

🔍 ऑपरेशन की कुछ चौंकाने वाली बातें भी सामने आईं…

– कर्मचारियों को आपस में बात करने की अनुमति नहीं थी
– कॉलिंग सिस्टम पूरी तरह वर्चुअल था—विदेशी नंबरों से कॉल किए जाते थे
– नेटवर्क इतना फैला हुआ था कि थाईलैंड, अमेरिका और खाड़ी देशों तक इसकी पहुँच थी

🎯 अब सवाल ये है…

– क्या MBA जैसी डिग्री अब ठगी का औजार बन रही है?
– क्या इतनी बड़ी कंपनी बिना किसी सरकारी निगरानी के सालों तक चल सकती है?
– क्या साइबर फ्रॉड अब संगठित उद्योग बन चुका है?

“एक नौकरी, जो रोज़ एक झूठ बेचती थी”

कानपुर की उस बिल्डिंग में रोज़ सुबह 150 लोग आते थे। कुछ फ्रेशर थे, कुछ एक्सपीरियंस्ड। सबको एक ही बात सिखाई जाती थी—“क्लाइंट को सपना दिखाओ, और फिर उसे बेच दो।”

हर डेस्क पर एक स्क्रिप्ट होती थी। उसमें लिखा होता था कि कैसे एक विदेशी व्यापारी को ये यकीन दिलाना है कि भारत में उसका बिज़नेस चमक सकता है—बस पहले रजिस्ट्रेशन फीस भेजो। कर्मचारी जानते थे कि ये झूठ है। लेकिन सैलरी अच्छी थी। टारगेट पूरे करने पर बोनस भी मिलता था। और सबसे बड़ी बात—बाहर से ये कंपनी एक इंटरनेशनल ट्रेडिंग फर्म लगती थी। अंदर से? एक साइबर फ्रॉड फैक्ट्री।

🧑‍💼 वो एक कर्मचारी

एक दिन, एक नए लड़के ने सवाल पूछ लिया—“सर, ये क्लाइंट बार-बार कह रहा है कि उसे कोई ऑर्डर नहीं मिला। हम फिर क्यों पैसे मांग रहे हैं?”

सुपरवाइज़र ने जवाब दिया—“तू सवाल पूछने आया है या सैलरी लेने?”

वो लड़का चुप रहा। लेकिन अंदर से टूट गया।

कुछ हफ्तों बाद, उसने हिम्मत की। पुलिस को गुप्त सूचना दी। और उसी एक कदम ने 50 करोड़ की ठगी का पर्दाफाश कर दिया।

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