TET प्रकरण मे शिक्षकों ने दी DM ऑफिस मे दस्तक.. CM व PM क़े समक्ष उठाई अपनी मांग
सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश से हज़ारों शिक्षको का भविष्य संकट में, CM व PM से लगाई फरियाद
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सौंपा ज्ञापन, कहा– “भविष्य अधर में न लटकाया जाए”

मुज़फ्फरनगर। सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षकों की योग्यता को लेकर सुनाए गए फैसले के बाद प्रदेश भर के शिक्षकों में गहरी चिंता और आक्रोश व्याप्त है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2011 से लागू बच्चों को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) के तहत नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी (Teacher Eligibility Test) उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। इसके बाद से वे सभी शिक्षक जो बिना TET पास किए वर्षों से सेवा दे रहे हैं, उनकी नियुक्ति पर प्रश्नचिह्न लग गया है। इस निर्णय को लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ क़े बैनर तले सैंकड़ो शिक्षकों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना दिया। ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी शैफालिका साहनी को दिया गया। मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री क़े नाम दिए गए ज्ञापन मे विशेष अध्यादेश लाकर इस काले कानून को निरस्त करने की मांग की गई।
जानकारी के मुताबिक, इस आदेश से प्रदेश के करीब ढाई लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। इनमें से अधिकतर शिक्षक 2011 के बाद से नियमित रूप से विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। अब अचानक उनकी योग्यता और नौकरी दोनों असमंजस की स्थिति में आ गई है।
सैंकड़ो शिक्षकों ने सोमवार को ज़िलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया और ज्ञापन सौंपा। संघ ने ज्ञापन में मांग की कि उत्तर प्रदेश सरकार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु की तरह ही शिक्षकों को राहत प्रदान करे।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति राज्य सरकार के आदेशों के आधार पर वैध रूप से की गई थी। कई शिक्षक 10 से 15 वर्षों से सेवा दे रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हुई।अचानक पात्रता पर सवाल उठने से शिक्षकों में गहरी मानसिक चिंता और असुरक्षा का माहौल है।यदि आदेश को लागू किया गया तो न केवल शिक्षक बेरोजगार होंगे बल्कि शिक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाएगी।
जिलाध्यक्ष अरविन्द मलिक ने यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र ही इस मामले पर ठोस कदम नहीं उठाया तो शिक्षक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
अब देखना होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षकों की इस गंभीर समस्या को हल करने के लिए क्या रणनीति अपनाती है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर नियुक्तियों को अस्वीकार करना न तो व्यावहारिक है और न ही शिक्षा के हित में। इस अवसर पर जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ क़े ज़िलाधक्ष संजीव बालियान, महासंघ जिलाध्यक्ष अरविन्द मलिक, योगेश देशवाल, विक्रांत कुमार, जय गिरी, सोनू कुमार, मंजू, सुभाष मलिक,गोवर्धन, मुकेश मलिक, नितिन, अलका रानी, अजय तोमर,कुलदीप पंवार, ज्योति,बिजेंद्र, गीता, संगीता, संजीव मोरना, इम्तियाज़ अली, महबूब अली, शर्मील राठी, अंजुला, बृजपाल राठी, धीर सिंह, अक्षय, दिनेश बालियान, मुकेश वर्मा, वंदना, सचिन, धर्मेन्द्र, सचिन आदि मौजूद रहे।




