साहित्य

भगवान बुद्ध को राजनीति की समझ नहीं थी?

अल्फा मेहता
आपको लगता है कि बुद्ध को राजनीति की समझ नहीं थी? पिता शुद्दोधन के इतने प्रयास के बाद भी उनका मोह सत्ता और राजपाट से ऐसे ही छूट गया? आपको लगता है कि बुद्ध को इतनी समझ नहीं थी जितनी मार्क्स, लेनिन, मोदी और ट्रम्प को है इस दुनिया की?
बुद्ध ने इन सब से आगे का सोचा था.. सत्ता और राजनीति जैसी आज है वैसी ही बुद्ध के समय में भी थी.. उस समय भी शुद्धोधन और उनके वंश “शाक्य” की साख दांव पर लगी रहती थी.. उन के लोगों को भी गर्व होता था शाक्य होने पर.. वो भी ऐसे थी.. हम और आप जैसे.. बुद्ध ने अपने पिताऔर उनकी सत्ता को समझ लिया था.. उन्हें पता था कि आज इन्हें शाक्य होने पर गर्व है.. कल हिन्दू होने पर होगा.. फिर मुसलमान होने पर होगा.. फिर भारतीय और नेपाली.. फिर भाजपाई और कांग्रेसी.. फिर राष्ट्रवादी और राष्ट्रद्रोही.. कम्युनिस्ट और लिबरल होने पर गर्व.. ये इनका गर्व और इनकी नीति कभी रुकने वाली नहीं है और यही पीड़ा है सारी.. जो बुद्ध के समय शाक्य नहीं थे वो पीड़ित थे.. जो आज कहीं और अल्पसंख्यक हैं वो पीड़ित हैं
इसलिए बुद्ध की समझ आप से कहीं गहरी थी.. वो पलायनवादी नहीं थे वो आपकी मूढ़ताओं से पलायन चाहते थे.. आपको लगता है कि उनको भी आपके जैसे धरने और प्रदर्शन कर के जीवन बिता देना चाहिए था.. गरीबों की सेवा करते और सरकार का विरोध या समर्थन में जीवन लगा देते तो सही था.. नहीं.. कुछ भी नहीं बदलता इससे.. बुद्ध ने इन सारी परेशानियों की जड़ को ढूंढने की कोशिश की और समाधान दिया आपको उसका
इसलिए मेरा कोई भी ध्यान आपकी इस राजनीति में नहीं होता है.. मुझे पता है कि समस्या कहीं और है.. आपकी इतनी क्रांतियों के बावजूद समूचे विश्व में कभी शान्ति स्थापित नहीं हो पायी है.. और एक आग विश्व में कहीं जलती है तो धीरे धीरे आपकी कुछ दिनों की तथाकथित शान्ति को चपेट में ले लेती है.. एक इस्लाम आया और उसके मानने वालों ने सारे पैंतरे लगा दिए उस धर्म को “वो” बताने में जो वो दरअसल था और है नहीं और समस्या को समस्या की तरह नहीं देखा उन्होंने और अब समूचा विश्व एक छोटे से कसबे से उपजे इस धर्म के विरोध में जूझ रहा है.. ऐसे ही इसाईयत था पहले ऐसे ही हिंदुत्व भी होगा आगे.. आपको लगता है कि समाधान किसी के सत्ता में होने या निकल जाने से होगा तो ऐसा कुछ भी नहीं है
ये जो मूर्छित लोगों द्वारा शान्ति मार्च निकाले जाते हैं इनका कोई मोल होता नहीं है दरअसल.. बुद्ध के पिता भी मूर्छित ही थे.. शाक्यों के रक्षक.. आपके नेता भी वही हैं.. आपके न्यूज़ और और आपके मीडिया और बड़े बड़े बुद्धिजीवी वही हैं.. आपको लगता है कि ये लोग आपको समाधान दे रहे हैं मगर ऐसा कुछ है नहीं.. अंधा अंधे को रास्ता दिखा रहा है बस
बुद्ध ही एकमात्र उपाय हैं.. बुद्ध को और करीब से जानना शुरू कीजिये.. जानिये कि मूल क्या है हमारे विश्व की इस अफरा तफरी का.. क्या मनोविज्ञान काम कर रहा है इन सबके पीछे और क्या समाधान है जो बुद्ध ने सुझाया है.. सारे पीर, सारे पैगम्बर, सारे अवतार सब समस्या हैं.. समाधान नहीं.. ईश्वर से परे बुद्ध की खोज ही विश्व शान्ति का एकमात्र समाधान है.. अपने बच्चों को इसे बताईये.. उन्हें योगी और ओवैसी से दूर ले जाईये.. ये सब मूर्छित और उतने ही मंद बुद्धि हैं जितना कि कोई भी आम मंदबुद्धि इंसान.. दिन रात फेसबुक पर इन मंदबुद्धियों के पीछे अपना समय मत खराब कीजिये।

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