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खतौली के MLA रहे विक्रम सैनी को हाईकोर्ट से राहत नहीं, सजा पर रोक से इंकार, अयोग्यता रहेगी बरकरार

मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से अयोग्य घोषित किए गए विधायक विक्रम सैनी को हाई कोर्ट से भी झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है।मुजफ्फरनगर की खतौली निधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक विक्रम सैनी  को स्थानीय अदालत ने मुजफ्फरनगर दंगे के मामले में दो साल की सजा सुनाई थी। जिसके बाद रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी की चिट्ठी के बाद विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने उनकी सदस्यता समाप्त करते हुए खतौली सीट को रिक्त घोषित कर दिया था। जिसके बाद चुनाव आयोग ने खतौली सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर दी थी और वहां 5 दिसंबर को मतदान होना है। इसी बीच विक्रम सैनी ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की जिसपर उन्होंने अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। उच्च न्यायालय ने विक्रम सैनी की इस याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति समित गोपाल की अदालत में इस याचिका पर सुनवाई की गई। वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य उपाध्याय ने विक्रम सैनी की तरफ से पैरवी की जबकि आईके चतुर्वेदी सरकारी वकील के रुप में पैरवी कर रहे थे।

क्या हुआ था वर्ष 2013 में…
कवाल कांड के बाद 29 अगस्त 2013 को कवाल गांव में दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए थे। हिंसा और आगजनी की घटना के बाद पुलिस ने तब पूर्व प्रधान के पति विक्रम सैनी समेत 28 लोगों के खिलाफ सिखेड़ा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में हुई। विधायक समेत 12 आरोपियों को धमकी देने के मामले में दो साल की सजा और पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

कोर्ट ने कहा-  इस कृत्य से स्वस्थ लोकतंत्र  को  नुकसान पहुंचा : पूर्व विधायक विक्रम सैनी को घातक हथियार से लैस भीड़ द्वारा दूसरों के जीवन सुरक्षा को खतरे में डालने, लोक सेवक को अपने कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने, आपराधिक बल से कानून और व्यवस्था के लिए समस्या पैदा कर शांति भंग करने के इरादे से की गई घटना पर सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने कहा नागरिकों के जीवन को खतरा खड़ा हुआ। उनके कृत्य से स्वस्थ लोकतंत्र के मूल्यों को भी नुकसान पहुंचा।

विक्रम सैनी की अपील पर दाखिल अर्जी कोर्ट  रिजेक्ट: यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल ने विक्रम सिंह सैनी उर्फ विकार सैनी की अपील पर दाखिल अर्जी को अस्वीकार करते हुए दिया। कोर्ट ने कहा कि याची की सजा को निलंबित करने का कोई आधार नहीं है। सजा विशेष परिस्थितियों में ही निलंबित की जा सकती है।

याची की ओर से क्‍या दी गई दलील : याची की ओर से कहा गया था कि मुजफ्फरनगर में तीन हिंदू युवकों की हत्या के बाद कई स्थानों पर दंगे भड़के थे। उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी और विक्रम सैनी भाजपा के कद्दावर नेता थे। इसलिए राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के कारण से झूठा फंसा दिया गया। उनके खिलाफ कोई सीधा साक्ष्य नहीं मिला है। पुलिस ने एफआइआर दर्ज कराई है और सभी गवाह भी पुलिस के ही है। कोई भी स्वतंत्र साक्षी नहीं है। वह निर्वाचित विधायक है और सजा कायम रहने की स्थिति में उसकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो चुकी है। वह भविष्य में चुनाव भी नहीं लड़ सकेगा। इसलिए अपील तय होने तक सजा निलंबित रखी जाए।

दंगे के दोषी को कारावास की सजा सुनाई थी : विक्रम सैनी सहित 12 आरोपियों को स्पेशल कोर्ट एमपी एमएलए ने मुजफ्फरनगर में दंगे का दोषी करार देते हुए 11 अक्तूबर 2022 को दो-दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के बाद चार नवंबर को सैनी की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई। इस सीट पर उपचुनाव होना है। इस दौरान स्पेशल कोर्ट ने सजा के बाद अंतरिम जमानत दे दी थी। उन्होंने सजा के खिलाफ अपील दाखिल करने के साथ ही हाई कोर्ट से नियमित जमानत दिए जाने की मांग की थी जिसे हाई कोर्ट ने मंजूर कर लिया था।

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