साहित्य

तकनीकी सोच वाले युवाओं के लिए अच्छा रहेगा 2022..

नरविजय यादव

पिछले 22 महीनों में भारत में नौकरियों की कमी होती चली गयी। महामारी के दौरान कारोबारियों की बिक्री घटी, घाटा बढ़ा और कामधंधे ठप होते गये। फलस्वरूप बेरोजगारी की दर में वृद्धि हुयी। नौकरी डॉट कॉम के मासिक इंडेक्स के मुताबिक, अप्रैल 2021 में नौकरी देने के कार्यों में 15 प्रतिशत की गिरावट आयी। अब जबकि अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटने लगी है, स्थितियां थोड़ी सुधरने लगी हैं। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के अनुसार, जून, 2021 में बेरोजगारी दर घटकर 9.2 प्रतिशत हो गयी, जबकि मई, 2021 में यह 11.9 प्रतिशत थी। माइकल पेज इंडिया के प्रबंध निदेशक निकोलस डुमौलिन का कहना है कि साल की शुरुआत में जॉब मार्केट में सुधार देखा गया था। दूसरी लहर ने कुछ चीजें अस्थायी तौर पर रुक सी गयीं, लेकिन पिछले कुछ समय से सुधार होता दिख रहा है। खास तौर पर तकनीकी रुझान वाले कामधंधों में। ऐसे में जिन युवाओं ने कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर, इन्फॉर्मेशन टैक्नोलॉजी, वेब होस्टिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऐसे ही अन्य कोर्स कर रखे हैं, आने वाले साल में उनके लिए रोजगार के भरपूर अवसर रहेंगे।

साल 2022 के नजरिए से देखें तो नये मिजाज के बिजनेस उम्मीद जगाते हैं, विशेष तौर पर तकनीकी कामधंधे। बदलते वक्त के साथ कदमताल करते हुए, अनेक कंपनियां तकनीकी क्षमताओं में वृद्धि कर रही हैं। इससे पता चलता है कि कंपनियों के काम के तरीके बदल रहे हैं और तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। आने वाले समय में तकनीकी शिक्षा और समझ वाले युवाओं की मांग बढ़ती जायेगी। टैक्नोलॉजी से जुड़े जॉब्स में तनख्वाह 40-50 प्रतिशत तक बढ़ रही है। भारत में तकनीकी विशेषज्ञ होने के लिए यह एक बढ़िया अवसर है और बंगलौर इसका गढ़ है। आईटी, सॉफ्टवेयर, हैल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जॉब्स बढ़े हैं। दूसरी ओर, यात्रा, पर्यटन और रिटेल सेक्टर में रोजगार के हालात अभी ठीक नहीं हैं।
भारत सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष संगठित क्षेत्र के जॉब्स में कमी दर्ज हुई है। यदि वित्त वर्ष 2019-20 से तुलना की जाये तो चालू वित्त वर्ष में रोजगारों में 25 लाख यानी 22.6 प्रतिशत की कमी पायी गयी है। रोजगार की स्थिति 2021 नामक इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड महामारी के दौरान सबसे ज्यादा जिन लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ, उनकी आयु 35 साल से कम थी। विषम परिस्थितियों के चलते 22 लाख लोगों को रोजगार से दूर होना पड़ा। रिपोर्ट में सितंबर 2017 से सितंबर 2021 तक के आंकड़े शामिल किये गये हैं। कोविड की दूसरी लहर के दौरान इस साल मई माह में नौकरियों की कमी रही, तो जुलाई में स्थिति बेहतर होती चली गयी। ब्रिटिश कंपनी आईएचएस की बिजनेस आउटलुक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में जून से अक्टूबर, 2021 के बीच सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का बिजनेस ऑप्टिमिज्म 12 से 14 प्रतिशत तक रहा। जापान, ब्राजील और रूस में भी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लेकर उत्साह रहा, लेकिन भारत जितना नहीं। भारत में प्राइवेट सेक्टर की 14 प्रतिशत कंपनियों ने अगले साल का लेकर अच्छी संभावनाएं जतायी हैं। इस सर्वे रिपोर्ट का यह भी कहना है कि 2022 में सर्विस सेक्टर की कंपनियां अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की इच्छा रखती हैं। यही एक ऐसा सेक्टर है, जो कोविड महामारी के बाद सबसे देरी से ओपन हुआ है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं कॉलमिस्ट हैं। narvijayindia@gmail.com

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