विवाहिता के सुसाइड मामले में आरोपी बरी, झूठी गवाही पर कोर्ट में कसा शिकंजा

मुजफ्फरनगर में विवाहिता द्वारा मायके में किए गए सुसाइड के मामले में आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। वादी मुकदमा सहित सभी 3 लोगों पर धारा 344 के अंतर्गत न्यायालय ने वाद दर्ज कर इन्हें नोटिस जारी किया है। बताया जाता है कि गवाहों ने अदालत को गुमराह किया था, जिसे चलते अदालत का समय खराब हुआ। मामला वर्ष 2019 का है,सिविल लाइन थाने पर मुकदमा दर्ज कराते हुए वादी मुकदमा अनीस निवासी हाजीपुरा ने बताया था कि उसकी बेटी ससुराल से अपने घर आई हुई थी। उसे मोहल्ले के ही शावेज व शाहरुख आदि परेशान करते हुए टॉर्चर कर रहे थे। आते जाते बेटी को परेशान किये जाने का आरोप लगाते हुए बताया कि उसकी बेटी अपने घर पर आई हुई थी। लगातार किये जा रहे टॉर्चर के चलते उनकी बेटी ने मायके में पहुंचकर अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में पुलिस ने शावेज, शाहरुख,यासीन व महरून के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट सुमित कुमार की अदालत में हुई। जहां अभियोजन पक्ष ने 9 गवाह पेश किये। आरोपी पक्ष के अधिवक्ता इशत्याक सिद्दीकी ने बताया कि इस मामले में गवाही को अपर सत्र न्यायाधीश सुमित पवार ने झूठा मानते हुए सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। वादी मुकदमा अनीस, उसकी पत्नी अफसाना व भाई रहीस पर धारा 344 के अंतर्गत वाद दर्ज कर नोटिस जारी किया है। इस मामले में धारा 344 के अंतर्गत दर्ज किए गए वाद में 1 अप्रैल की तिथि निर्धारित की गई है। फैसले में कहा गया है कि यदि किसी मामले में कोई गवाह झूठी गवाही देता है तो तो उस पर धारा 344 के अंतर्गत कार्रवाई करने के लिए संविधान में व्यवस्था दी गई है ताकि कोई अदालत का समय खराब ना कर सके।

युवती से फोन पर 280 बार बात किये जाने का आरोप था,मगर इस बात की कोई पुष्टि नही हुई कि आरोपी व युवती के बीच बात होती रही है।जांच में कनेक्शन युवती की माँ के नाम निकला। कोई सुसाइड नोट या वीडियो भी नही मिली जिससे साबित हो सके कि शाहवेज ने उसे आत्महत्या के लिए उकसाया।

इश्तियाक अहमद advocate


इशत्याक सिद्दीकी
आरोपी पक्ष के अधिवक्ता