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सामाजिक स्थिति पर प्रहार करता पत्रकार लियाकत मंसूरी का उपन्यास ‘मुझे उड़ने दो’….


साक्षात्कार

ऑनर किलिंग पर लिखे गए नॉविल की चारों तरफ हो रही प्रशंसा, पत्रकार का पहला उपन्यास बटोर रहा खूब सुर्खियां
अनस नसीर
मेरठ के वरिष्ठ पत्रकारों में शुमार लियाकत मंसूरी का लिखा गया उपन्यास ‘मुझे उड़ने दो’ आज-कल काफी चर्चाओं में है। ऑनर किलिंग पर लिखे गए इस नॉविल की चारों तरफ प्रशंसा हो रही है। अपने पहले ही उपन्यास में लियाकत मंसूरी ने ऑनर किलिंग जैसे संवेदनशील विषय को जितने सहज और स्वाभाविक रूप से प्रस्तुत किया है, वह सराहनीय है। उनका यह उपन्यास पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सामाजिक स्थिति को लेकर लिखा गया है। इस नॉविल की कहानी में लेखक ने 1990 का वह दौर दर्शाया है, जब प्यार का इकरार करने के लिए खतों का सहारा लिया जाता था। उपन्यास का ये सबसे खूबसूरत पहलू है।

रूढ़िवादी नजरिए को बेहद सादगी के साथ किया प्रस्तुत
‘मुझे उड़ने दो’ उपन्यास में वरिष्ठ पत्रकार लियाकत मंसूरी ने समाज के बीच खड़े इस ज्वलंत मुद्दे का सटीक चित्रण किया है। साथ ही इस उपन्यास में सामाजिक सौहार्द के खतरे, कुरीतियां और ग्रामीण अंचल में प्रेम को लेकर रूढ़िवादी नजरिया बेहद सादगी के साथ प्रस्तुत की है। उपन्यास में विलुप्त हो रहे खतों-किताबत के सिलसिले का वर्णन नई नस्ल के लिए अद्भुत है। अन्य कई पहलुओं को भी स्टीक अंदाज में उठाया गया है।

बेटी बचाओ अभियान के प्रति किया जागरूक
लेखक ने अपने उपन्यास के माध्यम से ऑनर किलिंग के मुद्दे को उठाकर बेटी बचाओ अभियान के प्रति जागरूकता लाने का भी काम किया है। इस उपन्यास के केंद्र में दो प्रसंग है, एक प्रेम तो दूसरा सामाजिक विदरूपता। लेखक ने अपनी रचनाओं में बहुत सीधे और साफ शब्दों में समाज की सच्चाई को व्यक्त किया है।

लियाकत मंसूरी मेरठ में दैनिक भास्कर के जिला प्रभारी है। ‘मुझे उड़ने दो’ को लेकर उनसे विशेष बातचीत की गई।

लियाक़त मंसूरी

सवाल– उपन्यास लिखने का विचार आपके मन में कैसे आया। क्योंकि आप एक पत्रकार है, तब आपने अपने व्यस्त समय में कैसे नॉविल लिखने का वक्त निकाल लिया।
जवाब– ये सही है कि पत्रकार के पास अपने लिए समय नहीं होता, हालांकि, उपन्यास लिखने का विचार काफी समय से था, लेकिन वक्त नहीं मिल रहा था। लॉकडाउन लगा तो फिर वक्त ही वक्त था। जब लिखने बैठा तो बस ‘मुझे उड़ने दो’ का पूरा करके ही सांस लिया। आपको बता दूं ‘मुझे उड़ने दो’ को जब पढ़ना शुरू करेंगे, तो आप रूकेंगे नहीं, इसका पूरा पढ़कर ही उठेंगे।

सवाल– आपने काफी लम्बे समय तक क्राइम रिपोटिंग की है, उस दौर में आपके सामने काफी विषय आए होंगे, जिन्हें आप लिख सकते थे, लेकिन आपने ऑनर किलिंग का चुनाव ही क्यों किया?
जवाब– ऑनर किलिंग हमेशा विचलित करती थी, झकझोर देती थी। हमेशा ऑनर किलिंग पर ही लिखने के बारे में सोचा, लेकिन कहानी की शुरूआत कहा से की जाए, ये समझ नहीं आ रहा था। लॉकडाउन के दौरान विचार आया कि सच्ची घटना पर ही उपन्यास लिखा जाए। अंतत: उन विचारों, भावनाओं एवं कल्पनाओं ने मूर्त रूप ले ही लिया और हिंदी में पहला उपन्यास “मुझे उड़ने दो” आपके सामने है। इस उपन्यास में कुछ बेहद कटु सत्यों से रूबरू कराते हुए उन्हें बेपर्दा किया गया है। यहीं वजह है कि ‘मुझे उड़ने दो’ का काफी पसंद किया जा रहा है।

सवाल- ये आपका पहला उपन्यास है, हम उम्मीद करें कि जल्द ही आपका दूसरा उपन्यास भी पाठकों के पास होगा।
जवाब– मैं बता दूं ‘मुझे उड़ने दो’ पहला भाग है। इसका दूसरा भाग ‘छू लिया आसमां’ प्रेस में है, जिसे दीवाली के बाद पब्लिश करने का विचार है। ‘छू लिया आसमां’ को वहीं से शुरू किया गया है, जहां ‘मुझे उड़ने दो’ को समाप्त किया गया था। उनका तीसरा उपन्यास ‘शिफॉन’ भी लगभग पूरा हो चुका है, जो 2024 में होली के आस-पास पब्लिश होगा।

सवाल- आप हर व्यक्ति के पास अपना नॉविल लेकर जा रहे हैं, ऐसा क्यों?
जवाब– ये आपका सही सवाल है, इसका सबसे बड़ा कारण है पाठकों का किताबों से दूर हो जाना। एक दौर था जब नॉविल और कॉमिक्स चोरी, छुपे पढ़ते थे, लेकिन अब टीवी और मोबाइल ने वह दौर हमसे छीन लिया है। मैं चाहता हूं मेरा नॉविल सबके पास पहुंचे, चाहे इसका माध्यम मैं ही क्यूं न बनूं।

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